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धनदा स्तोत्रम् | Dhanada Stotram |

           

 अथ धनदा स्तोत्रम्  

धनदा स्तोत्रम्


श्री  शिव उवाच 

अथातः सम्प्रवक्ष्यामि धनदास्तोत्रमुत्तमम् | 

यथोक्तं सर्वतन्त्रेषु इदानीं तत् प्रकाशितम् || 

नमः  सर्वस्वरुपेण  नमः  कल्याणदायिके |

 महासम्पत्प्रदे  देवि  धनदायै   नमोऽस्तुते || 

महाभोगप्रदे   देवि   महाकामप्रपूरिते | 

 सुखमोक्षप्रदे   देवि   धनदायै     नमोऽस्तुते ||   

ब्रह्मरुपे   सदानन्दे  सदानन्दस्वरुपिणि | 

 द्रुतसिद्धिप्रदे    देवि  धनदायै    नमोऽस्तुते ||  

उद्यत्सूर्यप्रकाशाभे   उद्यदादित्यमण्डले | 

 शिवतत्त्वप्रदे   देवि  धनदायै   नमोऽस्तुते ||  

विष्णुरुपे  विश्वमते  विश्वपालनकारिणि |

  महासत्वगुणाक्रान्ते  धनदायै   नमोऽस्तुते ||  

शिवरुपे  शिवानन्दे   कारणानन्द - विग्रहे |

  विश्वसंहाररुपे  च  धनदायै    नमोऽस्तुते ||  

पञ्चतत्त्वस्वरुपे   च  पञ्चाचार - सदारते  | 

 साधकाभीष्टदे   देविधनदायै    नमोऽस्तुते ||  

इदं स्तोत्रं मया प्रोक्तं साधकाभिष्टदायकम् |

 यः पठेत् पाठयेद्वापि स लभेत् सकल फलम् || 

त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स्तोत्रमेतत् समाहितः | 

स सिद्धिं लभते शीघ्रं नात्र कार्या विचारणा || 

इदं   रहस्यं   परमं  स्तोत्रं   परमदुर्लभम्  | 

 गोपनीयं   प्रयत्नेन   स्वयोनिरिव   पार्वति ||   

अप्रकाश्यमिदं  देवि  गोपनीयं परात्परम् | 

 प्रपठेन्नात्र  सन्देहो  धनवान्  जायतेऽचिरात् || 


         || इति धनदास्तोत्रम् सम्पूर्णम् || 

धनदा स्तोत्रम् | Dhanada Stotram |  धनदा स्तोत्रम् | Dhanada Stotram | Reviewed by karmkandbyanandpathak on 5:08 AM Rating: 5

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