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शमी वृक्ष का महत्व | Shami Vruksh Mahatva |

 

शमी वृक्ष का महत्व

शमी वृक्ष का महत्व


शमी वृक्ष का हमारे धर्म में बहुत ही महत्व बताया हुआ है | 
यह वृक्ष भगवान् गणपति को बहुत ही प्रिय है | 

गजानन उवाच 

समीपत्रस्य महिमा शृणुष्वार्य महाबलम् | 

न यज्ञैन च दानैश्च व्रतैः कोटिशतैरपि || २ || 


न जपैः पूजनैर्वापि मम तोषस्तथा भवेत् | 

न पद्मैर्नान्यकुसुमैः शमीपत्रैर्यथा भवेत् || ३ || 

शमीति कीर्तनादेव पापं नश्यति वाचिकम् | 

स्मरणान्मानसं पापं स्पर्शनात्कायजं तथा || ४ || 

नित्यं तत्पूजनाद्ध्यानाद्वन्दनाच्चैव भक्तितः | 

निर्विघ्नता तथा ऽऽयुष्यं ज्ञानं पापक्षयोऽपि च || ५ || 

वाञ्छादिद्धिरचापल्यं जायते नात्र संशयः | 


गजानन ने कहा 

हे आर्य, तुम शमीपत्र की महाबलशाली महिमा को सुनो |

 मुझको न तो यज्ञों से, न दानों, न कोटिशत ( सैकड़ों करोड़ ) व्रतों,

 न जपों, न पूजाओं, न कमल के पुष्पों एवं न अन्य पुष्पों के अर्पण से उस प्रकार का संतोष होता है जैसा कि मुझको शमीपत्र अर्पण करने पर होता है || २-३ || 

शमी का नाम लेने मात्र से वाचिक पाप नष्ट होते हैं,  

स्मरण से मानस पाप तथा उसके स्पर्श से कायिक पाप नष्ट होते हैं || ४ || 


|| अस्तु || 



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