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शिव ताण्डव स्तुति | Shiv Tandav Stuti |

 

शिव ताण्डव स्तुति 

शिव ताण्डव स्तुति 

देवा दिक्पतयः प्रयात परतः मुच्चताम्भोमचः | 
पातालं व्रज मेदिनि प्रविशत क्षोणीतलं मुधराः |
ब्रह्मन्नुन्नय दुरमात्मभुवनं नाथस्य नो नृत्यतः 
शम्भोः संकटमेतदित्यवतु वः प्रोत्सारणा नन्दिनः || १ || 

दोर्दण्डद्वयलीलयाचलगिरिभ्राम्यत्तदुच्चै रव 
ध्वानोद्भीतजगद्भ्रमत्पदभरालोलत्फणाग्र्योरगम् | 
भृङ्गापिङ्गजटाटवीपरिसरोद्गङ्गोर्मिमालाचल 
च्चन्द्रं चारु महेश्वरस्य भवतान्नः श्रेयसे ताण्डवम् || २ || 

संध्याताण्डवडम्बरव्यसनिनो भर्गस्य चण्डभ्रमि 
व्यानृत्यद्भुजदण्डमण्डलभुवो झञ्झानिलाः पान्तु वः | 
येषामुच्छलतां जवेन झटिति व्यूहेषु भूमिभृता 
मुड्डीनेषु विडौजसा पुनरसौ दम्भोलिरालोकिता || ३ || 

शर्वाणीपाणितालैश्चलवलयझणत्कारिभिः श्लाध्यमानं 
स्थाने सम्भाव्यमानं पुलकितवपुषा शम्भुना प्रेक्षकेण | 
खेलत्पिच्छालिकेकाकलकलकलितं क्रौञ्चभिद्बर्हियूनो 
हेरम्बाण्डबृंहातरलितमनसस्ताण्डवं त्वा धुनोतु || ४ || 

देवस्त्रैगुण्यभेदात् सृजति वितनुते संहरत्येष लोका 
नस्यैव व्यापिनीभिस्तनुभिरपि जगद्व्याप्तमष्टाभिरेव | 
वन्द्यो नास्येति पश्यन्निव चरणगतः पातु पुष्पञ्जलिर्वः    
शम्भोर्नृत्यावतारे वलयफणिफणाफूत्कृतैर्विप्रकीर्णः || ५ || 

|| इति शिवताण्डव स्तुतिः सम्पूर्णः ||     
शिव ताण्डव स्तुति | Shiv Tandav Stuti | शिव ताण्डव स्तुति | Shiv Tandav Stuti | Reviewed by karmkandbyanandpathak on 12:35 PM Rating: 5

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